
Kaal Bhairava is that form of Lord Mahadev who can even control Time (Kaal) itself.
Many people have doubts and fears about Lord Kaal Bhairava. They believe that if any mistake happens during His worship, terrible things will occur, or if He becomes displeased, He will cause harm.
But this is not true — it is only what people think.
Have you ever thought about this?
He is a form of Mahadev.
Lord Mahadev is extremely calm, compassionate, kind, and merciful. He never harms His devotees.
In the same way, Lord Kaal Bhairava is also a protector who always stays with His devotees. He never becomes angry at them. He is the son of Maa Kali.
No matter how fierce His appearance may seem, His heart is always filled with love for His devotees.
Worshipping Kaal Bhairava removes all kinds of problems from one’s life.
One should always worship Kaal Bhairava.
Mahaprabhu Bhairava never harms His devotees.
He always stands by them like a shield, protecting them every moment.
This Sabar Mantra is a very beneficial and powerful mantra.
Before going on any journey, you should always recite it before stepping out.
Om Namo, order to the Guru.
Kala Bhairava, Kali Raat Bhairava.
On the night of the new moon, Bhairava in front,
Bhairava behind, Bhairava on the right,
Bhairava on the left, Bhairava in the sky above,
Bhairava in the underworld below.
Five-folds east closed,
Five-folds west closed,
Five-folds north closed,
Five-folds south closed.
Water, land, mountains, caves—all closed.
Seven worlds, seven underworlds, the sky—all closed.
Houses closed, doors closed, witches closed,
Shakini, and witches closed.
Ghosts, spirits, demons, evil spirits,
witches closed, cremation grounds and graveyards closed.
Crematorium ashes, Aghori knowledge,
Aghora rituals—all closed.
Let Bhairava’s chains run—
every evil, good, and wicked power be closed.
The fear of death, the shadow of time,
the line of time, the power of mantra,
the attack on the tantra, the skull in the hand,
the enemy’s weapons—all are closed.
Protect me from every evil force and wicked enemy.
Build such a fortress that no one can break it,
and whoever does, will be bitten by Bhairava’s serpent—
the enemy will go to hell.
I appeal to Lord Shiva, I appeal to Mother Kali.
काल भैरव सावर (सबर) मंत्र

काल भैरव महादेव का वह स्वरूप हैं जो स्वयं काल (समय) को भी अधीन कर लेते हैं।
बहुत से लोगों के मन में महाप्रभु काल भैरव को लेकर भ्रम और भय होता है।
वे सोचते हैं कि उनकी पूजा में यदि कोई त्रुटि हो जाए तो बहुत बुरा होता है,
या यदि वे अप्रसन्न हो जाएँ तो हानि पहुँचाते हैं।
लेकिन यह सच नहीं है — यह केवल लोगों की मान्यता है।
क्या आपने कभी सोचा है?
वे महादेव का ही स्वरूप हैं।
भगवान महादेव अत्यंत शांत, करुणामय, दयालु और कृपालु हैं।
वे कभी भी अपने भक्तों का अनिष्ट नहीं करते।
उसी प्रकार भगवान काल भैरव भी अपने भक्तों के महान रक्षक हैं।
वे अपने भक्तों के साथ सदैव रहते हैं और कभी उन पर क्रोध नहीं करते।
वे माँ काली के पुत्र हैं।
उनका रूप चाहे जितना उग्र क्यों न हो,
उनका हृदय सदैव भक्तों के लिए प्रेम से भरा रहता है।
काल भैरव की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएँ और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं।
काल भैरव की पूजा हमेशा करनी चाहिए।
महाप्रभु भैरव कभी भी अपने भक्तों का अनिष्ट नहीं करते।
वे हमेशा ढाल बनकर उनकी रक्षा करते हैं।
यह सावर (सबर) मंत्र अत्यंत लाभदायक और शक्तिशाली मंत्र है।
किसी भी यात्रा पर निकलने से पहले इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए।
ॐ नमो आदेश गुरु को।
काला भैरव, काली रात भैरव।
अमावस्या की रात में आगे भैरव,
पीछे भैरव, दाएँ भैरव,
बाएँ भैरव, ऊपर आकाश में भैरव,
नीचे पाताल में भैरव।
पंचकोश पूर्व दिशा बंद,
पंचकोश पश्चिम दिशा बंद,
पंचकोश उत्तर दिशा बंद,
पंचकोश दक्षिण दिशा बंद।
जल, थल, पर्वत, गुफाएँ—सब बंद।
सात लोक, सात पाताल, नभखंड—सब बंद।
घर बंद, दरवाज़ा बंद, डाकिनी बंद,
शाकिनी, पिशाचिनी बंद।
भूत, प्रेत, बेताल, खबिश,
चुड़ैल बंद, श्मशान और मसान बंद।
शमशान की राख, अघोरी की विद्या,
अघोर क्रिया सब बंद।
भैरव की जंजीर चले—
हर बुरी, भली, दुष्ट शक्ति बंद।
मृत्यु का भय, काल की छाया,
समय की रेखा, मंत्र की शक्ति,
तंत्र पर प्रहार, हाथ का खप्पर,
शत्रु के अस्त्र—सब बंद।
हर बुरी शक्ति और दुष्ट शत्रु से रक्षा करो।
ऐसा किला बनाओ कि कोई मार खोले न,
और जो खोले, उसे भैरव का नाग डँसे—
शत्रु नरक को जाए।
दुहाई शिव शंकर की,
दुहाई माँ काली की।