
“Goddess Lakshmi is the deity of wealth. If a person has a lack of money or wealth does not stay with them, it means that Goddess Lakshmi is not pleased with that person.
In today’s time, people follow many wrong paths to become successful; but even if they achieve success through such ways, that wealth never stays with them for long. They do not know how it will come and how it will disappear.
Goddess Lakshmi always supports those whose wealth is earned through honesty.
This Lakshmi Stotra is extremely powerful and is very dear to Goddess Lakshmi. By reciting this stotra, one receives immense blessings of Goddess Lakshmi.”
1.
Kshamasva Bhagavatyamba Kshama Sheela Paratpare.
Pure sattva swaroop cha kopadi par barijite.
Meaning:
Goddess Lakshmi is the purest form of kindness and goodness and holds no anger toward anyone.
2.
upame sarva sadhvinam devinam dev pujite.
tvaya vina jagatsarvam mrut tulyam ch nishfalam॥
Meaning:
Lakshmi represents life, prosperity, and purpose. Without her blessings, life becomes empty.
3.
sarva sampatsvarupatvam sarvesham sarva rupini.
raseshvaryadhi devitvam tvatkalah sarvayoshitah॥
Meaning:
Lakshmi is present in all prosperity and in every woman as divine energy.
4.
kailase parvati tvam ch kshirodhe sindhu kanyaka.
svargech svargalakshmistvam mrutyalokyam ch bhutale॥
Meaning:
Lakshmi takes different forms in different divine realms.
5.
vaikuṇthe ch mahalakshmis devdevi sarasvati.
ganga ch tulsi tvam ch savitri bramaloktah॥
Meaning:
Lakshmi manifests as purity, knowledge, and devotion.
6.
krushnapranadhi devitvam goloke radhikasvayam.
rase raseshvari tvam ch vrunda vrundavane vane॥
Meaning:
Lakshmi appears as Radha and Vrinda in the divine pastimes of Lord Krishna.
7.
krushna priyatvam bhandire chandra chandan kanane.
viraja champak vane shatashrunge ch sundari॥
Meaning:
Different sacred forests reveal different forms of Lakshmi.
8.
padmavati padm vane malati malati vane.
kund danti kundvane sushila ketakivane॥
Meaning:
Lakshmi manifests as various divine feminine forms in nature.
9.
kadambamala tvam devi kadamb kanane̕pi ch.
rajalakshmih raj gehe gruhalakshmirgruhe grih॥
Meaning:
Lakshmi is present in both royal palaces and ordinary homes as prosperity.
10.
ityuktva devtah sarvaah munayo manavastatha.
rurudurn mradanah shusk kanthoshth talukah॥
Meaning:
Everyone—gods and sages—praised Lakshmi with deep devotion.
11.
iti lakshmi stavam punyam sarvadevaih krutam shubham.
yah pathet pratarutthay sa vai sarvam labhed dhruvam॥
Meaning:
Regular chanting grants prosperity and success.
12.
abharyo labhate bharyam vinitam susutam satim.
sushilam sundarim ramyam atisupriyamadinim॥
Meaning
“One who has no wife will get a good, virtuous wife.
13
putrapautravatim shuddham kuljam komalam varam.
aputro labhate putram vaishnavam chirajivinam॥
Meaning:
One without children will get noble, long-living children.
14
paramaishvaryayuktam ch vidyavantam yashasvinam.
bhrashtarajyo labhed rajyam bhrashtashrirlabhate shriyam॥
Meaning:
One without children will get noble, long-living children.
15
hatabandhurlabhed bandhum dhanabhrashto dhanam labhet.
kirtihino labhet kirtim pratishtham ch labhed dhruvam॥
One who has lost wealth will regain wealth.
One who has lost kingdom will regain his position.
One who lacks fame will become famous.”
Meaning:
The stotram removes obstacles and brings prosperity.
16.
sarvamangaladam stotram shokasantap nashanam.
harshanandakaram shashvaddharm moksh suhrutpadam॥
Meaning:
Lakshmi’s blessings bring peace, joy, and spiritual progress
सर्वदेव कृत लक्ष्मी स्तोत्रम्
“माता लक्ष्मी धन की देवी हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास धन की कमी रहती है या धन टिकता नहीं है, तो इसका अर्थ है कि माता लक्ष्मी उस व्यक्ति से प्रसन्न नहीं हैं।
आज के समय में लोग सफलता पाने के लिए कई गलत रास्तों का सहारा लेते हैं; लेकिन ऐसे तरीकों से यदि वे सफल भी हो जाएँ, तो वह धन उनके पास लंबे समय तक नहीं टिकता। उन्हें यह भी पता नहीं चलता कि वह धन कैसे आया और कैसे चला गया।
माता लक्ष्मी हमेशा उसी व्यक्ति का साथ देती हैं, जिसका धन ईमानदारी से कमाया गया हो।
यह लक्ष्मी स्तोत्र अत्यंत शक्तिशाली है और माता लक्ष्मी को बहुत प्रिय है। इस स्तोत्र का पाठ करने से माता लक्ष्मी की अपार कृपा प्राप्त होती है।”
1.
क्षमस्व भगवत्यम्ब क्षमा शीले परात्परे।
शुद्ध सत्त्व स्वरूपे च कोपादि परि वर्जिते॥
अर्थ:
देवी लक्ष्मी दया और करुणा की मूर्ति हैं। उनमें क्रोध या कठोरता नहीं रहती।
2.
उपमे सर्व साध्वीनां देवीनां देव पूजिते।
त्वया विना जगत्सर्वं मृत तुल्यं च निष्फलम्॥
अर्थ:
लक्ष्मी ही जीवन को सार्थक बनाती हैं। उनके बिना जीवन खाली और निष्फल हो जाता है।
3.
सर्व संपत्स्वरूपात्वं सर्वेषां सर्व रूपिणी।
रासेश्वर्यधि देवीत्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः॥
अर्थ:
लक्ष्मी ही सभी प्रकार की संपत्ति और शक्ति का मूल स्वरूप हैं। हर स्त्री में देवी की दिव्य ऊर्जा मौजूद है।
4.
कैलासे पार्वती त्वं च क्षीरोधे सिंधु कन्यका।
स्वर्गेच स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं मृत्यलोक्यां च भूतले॥
अर्थ:
देवी अलग-अलग लोकों में अलग-अलग रूपों में विराजमान होती हैं।
5.
वैकुण्ठे च महालक्ष्मीस् देवदेवी सरस्वती।
गंगा च तुलसी त्वं च सावित्री ब्रह्मलोकतः॥
अर्थ:
लक्ष्मी ही पवित्रता, ज्ञान, भक्ति और धर्म की शक्ति हैं।
6.
कृष्णप्राणाधि देवित्वं गोलोके राधिकास्वयम्।
रासे रासेश्वरी त्वं च वृन्दा वृन्दावने वने॥
अर्थ:
कृष्ण के दिव्य लीलाओं में देवी राधा और वृंदा, दोनों ही लक्ष्मी के रूप हैं।
7.
कृष्ण प्रियात्वं भाण्डीरे चन्द्रा चन्दन कानने।
विरजा चंपक वने शतशृंगे च सुन्दरी॥
अर्थ:
विभिन्न पवित्र वन और स्थान देवी के विभिन्न रूपों को प्रकट करते हैं।
8.
पद्मावती पद्म वने मालती मालती वने।
कुंद दंती कुंदवने सुशिला केतकीवने॥
अर्थ:
प्रकृति के विविध रूपों में देवी अपनी शक्तियाँ प्रकट करती हैं।
9.
कदंबमाला त्वं देवी कदंब काननेऽपि च।
राजलक्ष्मीः राज गेहे गृहलक्ष्मीर्गृहे गृह॥
अर्थ:
देवी समृद्धि के रूप में राजाओं के महल से लेकर साधारण घरों तक हर जगह उपस्थित रहती हैं।
10.
इत्युक्त्वा देवताः सर्वाः मुनयो मनवस्तथा।
रुरुदुर्न म्रदनाः शुष्क कण्ठोष्ठ तालुकाः॥
अर्थ:
सभी लोक देवी की आराधना करते हैं और भक्ति से भर जाते हैं।
11.
इति लक्ष्मी स्तवं पुण्यं सर्वदेवैः कृतं शुभम्।
यः पठेत् प्रातरुत्थाय स वै सर्वं लभेद् ध्रुवम्॥
अर्थ:
दैनिक पाठ से जीवन में सफलता, शांति और समृद्धि आती है।
12.
अभार्यो लभते भार्यां विनीतां सुसुतां सतीम्।
सुशीलां सुन्दरीं रम्यां अतिसुप्रियमादिनीम्॥
अर्थ:
जिसके पास पत्नी नहीं है, उसे उत्तम पत्नी का योग प्राप्त होता है।
13.
पुत्रपौत्रवतीं शुद्धां कुलजां कोमलां वराम्।
अपुत्रो लभते पुत्रं वैष्णवं चिरजीविनम्॥
अर्थ:
देवी की कृपा से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।
14.
परमैश्वर्ययुक्तं च विद्यावन्तं यशस्विनम्।
भ्रष्टराज्यो लभेद् राज्यम् भ्रष्टश्रीर्लभते श्रियम्॥
अर्थ:
खोई हुई प्रतिष्ठा, यश और संपत्ति पुनः प्राप्त होती है।
15.
हतबन्धुर्लभेद् बन्धुं धनभ्रष्टो धनं लभेत्।
कीर्तिहीनो लभेत् कीर्तिं प्रतिष्ठां च लभेद् ध्रुवम्॥
अर्थ:
स्तुति मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि प्रदान करती है।
16.
सर्वमंगलदं स्तोत्रं शोकसंताप नाशनम्।
हर्षानन्दकरं शाश्वद्धर्म मोक्ष सुहृत्पदम्॥
अर्थ:
लक्ष्मी कृपा से जीवन में आनंद, शांति और आध्यात्मिक उत्थान होता है।
समापन
॥ इति सर्वदेव कृत लक्ष्मी स्तोत्रं समाप्तम् ॥
यदि चाहें तो मैं पूरे स्तोत्र को देवनागरी में, ऑडियो उच्चारण, या पीडीएफ रूप में भी तैयार कर दूँ।