श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (हिंदी में पूर्ण पाठ):

माँ बगलामुखी की स्तुति करने से आपके सारे कष्टों का निवारण होता है।
माँ कल्याणमयी हैं — जो भक्त के जीवन से सभी दुखों और बाधाओं को दूर करती हैं।
यदि आप सुबह स्नान करके मन को एकाग्र कर माँ के स्तोत्र का ध्यानपूर्वक पाठ करते हैं,
तो माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं।

माँ के प्रसन्न होने से आपके सभी शत्रुओं का नाश हो जाता है,
और जीवन की हर समस्या का समाधान माँ की स्तुति में ही छिपा है।
इस अष्टोत्तर नाम स्तोत्र को प्रतिदिन स्नान के बाद श्रद्धा और भक्ति से पढ़ना चाहिए —
माँ भगवती अवश्य प्रसन्न होकर अपने भक्त की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।

नारद उवाच:
भगवान देवदेवेश! सृष्टि, स्थिति और लय के ईश्वर!
अब आप मुझे देवी बगलामुखी के सौ आठ नामों का स्तोत्र बताइए ॥ 1 ॥

श्री भगवान उवाच:
हे वत्स! सुनो, अब मैं तुम्हें पीतांबरा महादेवी (बगलामुखी) के
सौ आठ नामों का वह स्तोत्र बताता हूँ जो सभी पापों का नाश करता है ॥ 2 ॥

जिसके पाठ से मूक व्यक्ति वाणी पा लेता है,
और शत्रु तुरंत ही स्तंभित (निष्क्रिय) हो जाते हैं — यह सत्य है, सत्य है ॥ 3 ॥

ध्यान और विनियोग:
ॐ — इस श्री पीतांबरा अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र का ऋषि सदाशिव हैं,
छंद अनुष्टुप है, देवता श्री पीतांबरा देवी हैं,
और यह जप देवी की प्रसन्नता के लिए किया जाता है ॥

देवी के नाम:

ॐ बगलामुखी — विष्णु की पत्नी, विष्णु और शंकर की भाविनी,
बहुला, देवमाता, और स्वयं महाविष्णु की जननी ॥ 4 ॥

महामत्स्या, महाकूर्मा, महावराह रूपिणी,
नरसिंह प्रिय रम्या, वामना और पटुरूपिणी ॥ 5 ॥

जामदग्न्य स्वरूपा, श्रीराम द्वारा पूजिता,
कृष्णा, कपर्दिनी, कृत्या, कलहा और विकारिणी ॥ 6 ॥

बुद्धिरूपा, बुद्ध की भार्या, बौद्ध पाखंड नाशिनी,
कल्कि रूपा, कलिहंता, कलिदुर्गति नाशिनी ॥ 7 ॥

कोटि सूर्य के समान तेजस्विनी, कोटि कामदेव को मोहित करने वाली,
केवला, कठिना, काली, कला, और कैवल्य देने वाली ॥ 8 ॥

केशवी, केशव द्वारा आराध्य, किशोरी, केशव द्वारा स्तुत्य,
रुद्र रूपा, रुद्र मूर्ति, रुद्राणी और रुद्र देवता ॥ 9 ॥

नक्षत्र रूपा, नक्षत्रा, नक्षत्रेश द्वारा पूजिता,
नक्षत्रेश प्रिय, नित्य और नक्षत्रपति द्वारा वंदिता ॥ 10 ॥

नागिनी, नाग जननी, नागराज द्वारा वंदिता,
नागेश्वरी, नाग कन्या, नागरी और नगात्मजा ॥ 11 ॥

नगाधिराज की कन्या, नगराज द्वारा पूजिता,
नवीन, नीरदा, पीता, श्यामा और सौंदर्यकारीणी ॥ 12 ॥

रक्ता, नीला, घना, शुभ्रा, श्वेता, सौभाग्यदायिनी,
सुंदरी, सौभाग्या, सौम्या, स्वर्णाभा और स्वर्गगति प्रदा ॥ 13 ॥

शत्रु भय उत्पन्न करने वाली, रेखा, शत्रु संहारिणी,
भामिनी, माया, स्तंभिनी, मोहिनी और शुभा ॥ 14 ॥

राग-द्वेष नाशिनी, रात्रि, रौरव (नरक) नाशिनी,
यक्षिणी, सिद्धों की अधिष्ठात्री, सिद्धेश्वरी और सिद्धिरूपिणी ॥ 15 ॥

लंका पति (रावण) का संहार करने वाली, लंकेश के शत्रुओं द्वारा वंदिता,
लंका नाथ कुल हंता और महा रावण हंता ॥ 16 ॥

देव, दानव और सिद्धों द्वारा पूजिता परमेश्वरी,
परम अणु रूपा, परमा, परतंत्र विनाशिनी ॥ 17 ॥

वर देने वाली, वरद आराध्या, वरदान में तल्लीन,
वरदेश प्रिय, वीर रूपा, वीरभूषण भूषिता ॥ 18 ॥

वसुदा, बहुदा, वाणी, ब्रह्म रूपा, वरानना,
बलदायिनी, पीत वस्त्र धारी, पीत आभूषण भूषिता ॥ 19 ॥

पीत पुष्प प्रिय, पीत हार धारण करने वाली, पीत स्वरूपिणी —
हे विप्र! इस प्रकार मैंने तुम्हें देवी के 108 नाम बताए ॥ 20 ॥

जो व्यक्ति इस स्तोत्र को स्वयं पढ़ता है, दूसरों से पढ़वाता है,
या श्रद्धा से सुनता है — उसके शत्रु शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं ॥ 21 ॥

जो व्यक्ति प्रातःकाल शुद्ध होकर,
श्रद्धा और भक्ति से पीतांबरा देवी का ध्यान कर यह स्तोत्र पढ़ता है,
उसकी सभी वृद्धियाँ (सफलताएँ) स्थिर हो जाती हैं
और उसके शत्रु स्वयं नष्ट हो जाते हैं ॥ 22 ॥

इति श्री विष्णुयामले नारद-विष्णु संवादे
श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रं समाप्तम्

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